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गौरवशाली विरासत

  • आरंभिक इतिहास - नए युग की शुरूआत

थोड़े समय के लिए अतीत में झाँकिए क्योंकि हम आपको भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लि. की विकास कथा में पीछे की ओर ले जा रहे हैं। भारतीय उद्योग के इतिहास का एक नया अध्याय।

सबसे पहले पेट्रोलियम (लैटिन पेट्रा-रॉक एवं ओलीयम ऑयल से उत्पन्न) नमक के लिए खोदे गए कुओं से आया। लोगों ने इसे जलाने की दृष्टि से उपयोगी पाया और इसकी माँग धीरे-धीरे बढ़ने लगी।सैम्युअल कीर नाम एक पिट्सबर्ग औषध विक्रेता ने पेट्रोलियम को दवाई के रूप में बोतल में भर कर विपणित किया।एक डिओडोराइज्ड वैरिएन्ट विपणित करने के लिए उसने 1852 में पहली आदिकालीन रिफाइनरी की संरचना बनाई जो धातु के टैंक से जुड़ी एक विशाल कामचलाऊ केटली थी। 'कालोनेल' एडविन ड्रेक और 'अंकल' बिली स्मिथ ने तेल खोजने के विशेष उद्देश्य से कुआँ खोदा और 27 अगस्त, 1859 को उन्हें उत्तर पश्चिम पेन्सिलवेनिया के टिटुस्वेल में 69.5 फीट की गहराई पर तेल मिला।

  • शून्य से स्वर्ण तक

1860 में बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास हुआ।काफी पेट्रोलियम रिफाइनरियां भी अस्तित्व में आई।
उस वक्त दक्षिण एशिया के बाज़ार में बर्मा ऑयल कंपनी एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी थी। यद्यपि इसे 1886 में स्कॉटलैंड में समाहित किया गया, तथापि इस कंपनी ने रंगून ऑयल कंपनी की उद्यमशीलता के कारण इतनी उन्नति की जिसका गठन 1871 में अपर बर्मा में हाथ से खुदे आदिकालीन कुओं से निकले क्रूड ऑयल के परिशोधन के लिए किया गया था। भारत में तेल की खोज़ 1886 में शुरू हुई जब मैककिलोप स्टीवर्ट कंपनी के श्री गुडएनफ ने अपर आसाम में जेपोर के नज़दीक एक कुआं खोदा।1889 में असम रेलवे एंड ट्रेडिंग कंपनी (एआरटीसी) को दिगबोई में तेल मिला और यहीं से भारत में तेल उत्पादन की शुरूआत हुई।

खोज जारी रही और उद्योग बढ़ता गया, इसी बीच जॉन डी रॉकफेलर ने अपने व्यापारिक सहयोगी के साथ अनेक रिफाइनरी एवं पाइपलाइन पर नियंत्रण हासिल किया और बाद में विशालकाय स्टैण्डर्ड ऑयल ट्रस्ट की स्थापना की। स्टैण्डर्ड ऑयल के सबसे बड़े प्रतियोगी - रॉयल डच, शेल, रोथशील्ड्स ने एक साथ मिलकर एक ही संगठन: एशियाटिक पेट्रोलियम की स्थापना की ताकि दक्षिण एशिया में पेट्रोलियम उत्पादों का विपणन किया जा सके।

वर्ष 1928 में एशियाटिक पेट्रोलियम (भारत) ने बर्मा ऑयल कंपनी के साथ हाथ मिला - एक ऐसी कंपनी जो खास कर भारत और बर्मा के बाज़ारों में पेट्रोलियम उत्पादों की सक्रिय उत्पादक, परिशोधक और वितरक थी। इस गठबंधन से बर्मा-शेल ऑयल स्टोरेज और डिस्ट्रिब्यूटिंग कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड का गठन हुआ।

  • एक पुरोगामी भावना - बर्मा शेल मार्केटिंग

अनेक मामले में पथ-प्रदर्शक रहे बर्मा-शेल ने केरोसीन के आयात और विपणन से अपनी परिचालन यात्रा की शुरूआत की। इसे थोक में आयात किया जाता था और 4 गैलन एवं 1 गैलन टिन में रेल, सड़क और देसी साधनों से भारत भर में भेजा जाता था।

दूरदराज के गाँवों के लोगों तक पहुँचने की चुनौती को कंपनी ने स्वीकार किया हर घर को केरोसीन की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। उजाला करने और खाना पकाने के लिए केरोसीन से चलने वाले साधनों का विकास और प्रचार केरोसीन बिक्री गतिविधि का महत्वपूर्ण हिस्सा था।

मोटर कार आने के बाद डिब्बा बंद पेट्रोल आया और फिर सर्विस स्टेशन आए। 1930 में रिटेल सेल्स प्वाइंट बनाए गए और सड़क से हटकर ड्राइववेज़ बनाए गए; सर्विस स्टेशन आने शुरू हुए और ये सड़क विकास के हिस्से के रूप में स्वीकार किए जाने लगे। युद्ध के बाद बर्मा शेल ने सक्षम और अत्याधुनिक सर्विस एवं फिलिंग स्टेशन स्थापित किए ताकि ग्राहकों को जितनी संभव हो उतनी उच्च स्तर की सेवाएं प्रदान की जा सके।

15 अक्तूबर, 1932, को जब भारत में नागरी विमानन आया तब इस कंपनी को जे.आर.डी. टाटा की ऐतिहासिक एकल उड़ान में ईंधन भरने का सम्मान प्राप्त हुआ। यह उड़ान सिंगल इंजिन डी हैविलियन पुस मॉथ के साथ कराची से अहमदाबाद होते हुए मुंबई (जुहू) के लिए भरी गई थी। तीस साल बाद यानि 1962 में बर्मा शेल फिर से जेआरडी की मूल फ्लाइट के री-एनक्टमेंट में ईंधन भरने का सम्मान प्राप्त हुआ। बर्मा शेल फ्लाइंग बोट में भी ईंधन भरता था जो अनेक लोकेशनों में समुद्री यातायात से थोड़ी अधिक कीमत पर एयर मेल ले जाते थे।

एक सच्चे पथ-प्रदर्शक के रूप में कंपनी ने 1950 के मध्य में भारतीय घरों के लिए एलपीजी को खाना पकाने के ईंधन के रूप से प्रस्तुत किया। और इस तरह ये मध्य पेट्रोलियम बेचने से कहीं आगे जाकर ग्राहकों को शिक्षित करने लगे।
बिटुमेन बेचने के अलावा कंपनी ने मरूभूमि में सड़क बनाने, सड़क इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने में भी अग्रणीय भूमिका निभाई। इसने छोटे-बड़े औद्योगिक ग्राहकों को मुफ्त तकनीकी सेवाएं मुहैया करवायी - जो कंपनी की संस्कृति का एक हिस्सा बन गया।

  • सुप्रवाही - द बर्मा शेल रिफाइनरी

बर्मा शेल ग्रुप ऑफ कंपनीज़ एवं भारत सरकार के बीच 15 दिसम्बर, 1951 को यह करार हस्ताक्षरित किया गया कि ट्राम्बे, मुंबई में एक आधुनिक रिफाइनरी स्थापित की जाएगी।

बर्मा शेल रिफाइनरीज़ लिमिटेड को भारतीय कंपनीज़ अधिनियम के अन्तर्गत 3 नवम्बर, 1952 को एक निजी कंपनी के रूप में समाहित किया गया और मुंबई स्थित ट्राम्बे की दलदली जमीन पर काम शुरू हुआ। मानव और मशीन का अथक काम चालू हुआ और जल्द ही दलदल की जगह टावर, स्टील के टैंक तथा मीलों मील लम्बी पाइपलाइनों ने ले ली।

माहुल गाँव में 454 एकड़ जमीन पर खड़ी रिफाइनरी 30 जनवरी 1955 को सुप्रवाही (ऑन स्ट्रीम) हुई। यह तय समय सीमा से एक साल पहले पूरी हुई। भारत के उपराष्ट्रपति डॉ. एस. राधाकृष्णन ने 17 मार्च, 1955 को 2.2 एमएमटीपीए (मिलियन मेट्रिक टन प्रति वर्ष) क्षमतावाली इस रिफाइनरी को चालू घोषित किया। उस वक्त यह भारत की सबसे बड़ी रिफाइनरी थी।
इस बुनियादी ढाँचे के साथ मुक्त भारत आत्मनिर्भरता के करीब एक कदम और आगे बढ़ा।

  • बर्माशेल से भारत पेट्रोलियम तक

24 जनवरी, 1976 को बर्मा शेल ग्रुप ऑफ कंपनीज़ को भारत सरकार ने अभिग्रहित कर भारत रिफाइनरीज़ लिमिटेड गठित की। 1 अगस्त, 1977 को इसे फिर से नया नाम दिया गया 'भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड'। देश में नए-नए प्राप्त घरेलू क्रूड (बॉम्बे हाई) का परिशोधन करनेवाली पहली रिफाइनरी का श्रेय भी इसे ही जाता है।

भविष्य को आकार देना

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड में सबसे महत्वपूर्ण एवं अहम बात यही मानी जाती है कि गुणात्मक उत्कृष्टता के जरिए अधिकतम ग्राहक संतोष प्रदान करना। इस प्रकार भारत पेट्रोलियम यानि पूर्ववर्ती बर्मा शेल आज पेट्रोलियम उद्योग के सबसे मज़बूत नामों एक है।

भारत पेट्रोलियम नाना प्रकार के उत्पाद निर्मित करता है, जैसे पेट्रोकेमिकल्स और सॉल्वेंट से एयरक्राफ्ट ईंधन और विशेष लुब्रिकेन्ट्स। सैंकड़ों उद्योगों और अनेको अन्तराष्ट्रीय तथा घरेलू एयरलाइन्स को सीधे ईंधन की आपूर्ति करने के अलावा यह इन उत्पादों को अपने पेट्रोल स्टेशनों, केरोसीन डीलरों, एलपीजी वितरकों लूब शॉपी के जरिए विपणित करता है।

  • राष्ट्रीयकरण के बाद गतिशील वृद्धि

1976 में राष्ट्रीयकरण के बाद भारत पेट्रोलियम ने कमर कसी और लगातार उन्नति के पथ पर अग्रसर हुआ। कुल बिक्री, लाभप्रदता और वित्तीय प्रारक्षितों में दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की हुई। भारी विस्तार और आधुनिकीकरण ने कंपनी के प्रदर्शन को अभूतपूर्व बना दिया। विस्तार की माँगों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर भर्ती और प्रशिक्षण को अत्यंत महत्वपूर्ण बना दिया।

  • परिवर्तन की हवा - उभरा एक रूपांतरित प्रतिष्ठान

नब्बे के दशक में आई मुक्त भारतीय अर्थव्यवस्था अपने साथ प्रतियोगिता और चुनौतियाँ भी लेकर आई जिसने प्रशासित मूल्य-निर्धारण तंत्र (एपीएम) को चरणबद्ध तरीके से हटाने और परिशोधन एवं विपणन के क्षेत्र में अतिरिक्त क्षमताओं के उदय को भी प्रेरित किया।

1996 में भारत पेट्रोलियम ने विजनिंग (संकल्पना) की प्रक्रिया अपनाई जिसमें सभी स्तरों पर लोगों को शामिल कर एक सांझी दृष्टि और सांझे मूल्य विकसित किए गए। इसके आधार पर कंपनी की फिर से संरचना की गई ताकि पूर्वलक्षी चाल से उभरते प्रतियोगी परिदृश्य के अनुरूप खुद को ढाला जा सके। कंपनी ने अपने कार्य आधारित ढाँचे को बड़ी सावधानी से हटा कर उसकी जगह प्रक्रिया आधारित संरचना खड़ी की। इससे कंपनी अपने ग्राहक की जरूरतों के प्रति और अधिक प्रतिक्रियाशील हो गई।

भारत पेट्रोलियम ने महसूस किया कि आगे चलकर केवल सम्पूर्ण पुनर्विन्यास और प्रमुख बिंदुओं पर ग्राहक से निवेदन में परिवर्तन के बल पर ही सफलता हासिल की जा सकती है। अत: कॉर्पोरेट सेन्टर, स्टैटेपिक बिजनेस यूनिट (एसबीयू) और शेयर्ड सर्विसेस एवं एन्टीटीज़ में पुनर्गठित है। पाँच ग्राहकोन्मुख एसबीयू यानि विमानन, औद्योगिक एवं वाणिज्यिक, एलपीजी, लुब्रिकेन्ट्स और रिटेल तथा एक परिसंपत्ति आधारित एसबीयू यानि रिफाइनरी के रूप में कंपनी की मौजूदा ड़िजाइन उन्नत ग्राहक केन्द्रित दर्शन पर आधारित है।

आयोजित निवेदन

बढ़ते वैश्‍वीकरण, नए उत्पादों तथा सेवाओं और विपणन के नायाब तरीकों ने उपभोक्ता को अत्यंत बाज़ारक्षम बना दिया है। विपणनकर्ताओं की उत्पादन आधारित सफलता के दर्शन की जगह अब ग्राहकोन्मुख दर्शन ने ले ली है। भारत पेट्रोलियम ने समय रहते स्थिति का जायज़ा लिया और बदलते समय के साथ चलने के लिए बुनियादी कदम उठा रही है क्योंकि कंपनी यह मानती है भविष्य उसका है जो ग्राहकों की सुने और उनके अनुरूप ढले।

  • रणनीति का विकास

भारत पेट्रोलियम की मान्यता है कि सभी रणनीतिपरक अभिक्रम कॉर्पोरेशन के समग्र मूल्यदृष्टि के अनुरूप और आर्थिक मूल्य बेहतर बनाने वाले होने चाहिए। कॉर्पोरेट स्तर पर रणनीति विकास के प्रयत्नों को नई संगठनात्मक संरचना में बेहतर फोकस मिलता है जिसके साथ एसबीयू को उनकी संबंधित रणनीतियाँ विकसित करने में भी आसानी होती है जो अंतत: एकीकृत कॉर्पोरेट रणनीति की ओर जाती है। एक व्यापार आयोजना प्रक्रिया बनाई गई है जो न केवल एसबीयू को उनके संकल्पनात्मक लक्ष्यों के साथ-साथ कॉर्पोरेट विज़न हासिल करने के अवसर प्रदान करती है बल्कि कॉर्पोरेशन के लिए लगातार रूझानों की निगरानी रखती है और रणनीतिपरक अवसरों की पहचान करती है

  • ब्राण्ड प्रबंधन

अत्यंत प्रतियोगी परिदृश्य में प्रबल ब्राण्ड बनाना परम आवश्यक है। भारत पेट्रोलियम की ब्राण्ड मैनेजमेंट टीम भारत पेट्रोलियम के प्रधान मूल्य 'इन केयर' जैसे नए विचारों वाली, ख्याति रखनेवाली और भरोसे को दर्शानेवाली, मजबूत ब्राण्ड इमेज को बनाने और उसके रखरखाव का प्रयत्न करती है, और वह भी काफी किफायती तरीके से।

  • अनुसंधान एवं विकास

संपोषित वृद्धि और लाभप्रदता हासिल करने के लिए अनुसंधान एवं विकास (आर एण्ड डी) बीपीसीएल का एक अभिन्न हिस्सा है। अपनी आर एण्ड डी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए बीपीसीएल अपने अलग-अलग केन्द्रों से काम करता है जैसे, कॉर्पोरेट आरएण्डडी सेंटर, ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश, उत्पाद एवं प्रयोजन विकास केन्द्र, शिवड़ी, मुंबई, कोच्चि रिफाइनरी आरएण्डडी सेंटर, कोच्चि और मुंबई रिफाइरी स्थित आरएण्डडी सेंटर। इनका कुल वार्षिक व्यय लगभग 256 मिलियन रू. आता है।
फ्लुइड कैटेलिटिक यूनिट के लिए सीओ प्रमोटर कैटेलिस्ट, एलपीजी स्वीटनिंग कैटेलिस्ट जैसे इन हाऊस कैटेलिस्ट के विकास और व्यावसायिकरण के जरिए आरएण्डडी सेन्टर ने रिफाइनरियों के मूल्यवर्द्धन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आरएण्डडी भारत मेटल कटिंग गैस जैसे मूल्यवर्द्धित उत्पादों के विकास एवं व्यावसायिकरण के जरिए भी कारोबार की लाभप्रदता बढ़ाने में प्रमुख योगदान देते हैं। आई फ्री फैटी ऐसिड अंशवाले नॉन-एडीबल ऑयल से बायो डीज़ल के रूपान्तरण के लिए एक किफायती प्रक्रिया मिल गई है। कोयले से स्वच्छ तरल ईंधन, बायो फ्यूएल और हाइड्रोजन स्टोरेज़ जैसे उभरनेवाले क्षेत्रों में प्रमुख अनुसंधान परियोजनाएं शुरू की गई हैं।

तकनीकी बढ़त

भारत पेट्रोलियम हमेशा से प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणीय रहा है। अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, अधिकतम दक्षता और अधिक से अधिक ग्राहक संतोष में, यह हमेशा आगे रहा है।
भारत पेट्रोलियम पहली सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी है जिसने इंटरप्राइजवाइड रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी) सॉल्यूशन - एसएपी लागू किया है। लाग की गई यह परियोजना एनट्रांस (एन्टरप्राइज़ ट्रांसफॉरमेशन) के नाम से जानी जाती है जिसे "एसएपी स्टार कार्यान्वयन अवार्ड" प्रदान किया गया है तथा भारत पेट्रोलियम को भारत की सबसे बड़ी एवं अति महत्वाकांक्षी एसएपी परियोजना को लागू करने की उपाधि प्राप्त हुई। एसएपी लागू करने की सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना था कि सभी एकीकृत तत्व (जटिल मल्टीमॉड्यूलर इंटीग्रेटेड सॉल्यूशन जो प्रतिष्ठान के समूचे कार्यप्रवाह को प्रभावित करते हैं) पूरे देश भर में सीमारहित होकर काम करें, जिसमें दूर-दराज़ के लोकेशन भी शामिल हैं। इन दूरस्थ इलाकों को ऑनलाइन कनेक्टिविटी देना, पूरी तरह आईटी नेटवर्क इन्फ्रान्स्ट्रक्चर देना ही अपने आप में हिम्मत का काम है।
भारत पेट्रोलियम अपने परिचालन के अनेक क्षेत्रों में इंटीग्रेटेड सिस्टम के फायदे उठा रहा है। यह सिस्टम सबसे पहले लागू करने के फायदों में विशाल संख्या में एरिया के ऑपरेशन में आसानी के अलावा संभावित ग्राहक की ट्रैकिंग, क्रेडिट मैनेजमेंट की निगरानी, माल-सूची प्रबंधन भी शामिल है।
इससे आगे भारत पेट्रोलियम ने अंतिम प्रयोक्ता को ऑन लाइन सपोर्ट देने के लिए एशिया के सबसे बड़े "सेंटर्स ऑफ एक्सीलेस" में से एक, स्थापित किया है और व्यापार प्रक्रियाओं में लगातार उन्नति के लिए भी काम करता है। साथ ही प्रॉडक्ट अपग्रेड एवं न्यू जनरेशन प्रॉडक्ट भी हैण्डल करता है।
एसएपी के रूप में आईटी की आधारशिला होने के कारण भारत पेट्रोलियम की इंटरनेट आधारित क्षमताओं का लाभ उठाने की योजना है, साथ में कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजमेंट सॉल्यूशन सहित समूची वैल्यू चेन की भी योजना है। एक विशाल डेटावेयरहाऊस परियोजना भी कार्यान्वित की गई है जो सभी भारत पेट्रोलियम लोकेशनों में की परफॉरमेंस इंडीकेटरों (प्रथम प्रदर्शन सूचकों) पर वास्तविक समय की सटीक जानकारी देना आसान बनाएगा।

पहले व्यक्ति फिर तेल

सालों से भारत पेट्रोलियम उत्पादों एवं सेवाओं के विपणन में परिवर्तन की ओर जाने वाले तेज़ी से बदलते परिवेश की चुनौतियों का लगातार सामना कर रहा है। इर सारे बदलावों में केवल एक चीज़ अपरिवर्तनीय रही और किसी भी भावी अभिक्रम में भारत पेट्रोलियम की शक्ति एवं प्रेरणा-स्त्रोत रही - वह है भारत पेट्रोलियम के लोग। स्वामित्व की भावना ने सभी कर्मचारियों को बाज़ार की जटिलताओं और ग्राहकों की आवश्यकताओं को समझने की प्रक्रिया को आसान बनाया है और इन जरूरतों का प्रत्युत्तर नए अभिक्रमों एवं प्रस्तावों के माध्यम से देना भी सुविधाजनक हुआ है।

भारत पेट्रोलियम के लिए कर्मचारियों की वचनबद्धता एक चरम स्त्रोत है। केवल एक प्रसन्न कर्मचारी ही ग्राहकों की सर्वोत्तम सेवा कर सकता है, इस बात को पूरी तरह समझते हुए भारत पेट्रोलियम ने कई ऐसे कदम उठाए हैं जो इस कंपनी को काम करने की एक महान जगह बनाते हैं। बिज़नेस टुडे पत्रिका को जनवरी 2001 के अंक में हेविट एसोसिएट्स द्वारा किए गए सर्वेक्षण में भारत पेट्रोलियम को भारत के दस सर्वोत्तम नियोक्ताओं में से एक घोषित किया गया था। इस अध्ययन का उद्देश्य यह मालूम करना था कि किन कंपनियों ने अपने कर्मचारियों की भावात्मक एवं बौद्धिक ऊर्जा को वस्तुत: उद्दीप्त किया है। अन्य चयनित कंपनियों में शामिल है इंफोसिस, हेविट पेकार्ड, पी एण्ड जी, आईसीआईसीआई, ह्यूग्स, एलजी, एचएलएल, कॉम्पैक तथा एशियन पेंट्स।

भारत पेट्रोलियम व्यक्ति और उनकी संगठनात्मक क्षमताओं के विकास के लिए प्रभावी मूल्य आधारित मानव संसाधन प्रक्रियाएं घोषित करता है ताकि उनमें प्रतियोगी बढ़त की भावना आए और साथ ही उनकी व्यक्तिगत मूल्यदृष्टि के साथ कॉर्पोरेट मूल्य दृष्टि का तालमेल बैठाया जा सके। जिन क्षेत्रों में जोर दिया जाता है, वह है:

  • प्रदर्शन प्रबंधन, जो व्यापारिक लक्ष्यों के साथ व्यक्तिगत प्रदर्शन लक्ष्यों को जोड़ता है।
  • योग्य प्रतिभा के जरिए स्टाफ की योग्यताओं और क्षमताओं को पहचानना ताकि सही व्यक्ति को सही काम के लिए पहचान कर नियुक्त किया जा सके।
  • क्षमता अंतराल को पहचानना और ऐसे खाली स्थान को उपयुक्त प्रशिक्षण एवं विकास कार्यक्रमों के जरिए भरना।
  • बहु-योग्यता यानि एनहान्स्ड फ्यूएल प्रपोजिशन, एड ऑन स्टोर्स, वन स्टॉप ट्रक शॉप्स, ग्रॉसरी एवं फास्ट फूड स्टोर्स आदि विभिन्न क्षेत्रों के लिए कर्मचारियों को नए अभिक्रम हेतु प्रोत्साहित करना।
भारत पेट्रोलियम को मानव संसाधन विकास में अभूतपूर्व योगदान के लिए राष्ट्रीय मासंवि नेटवर्क द्वारा राष्ट्रीय मासंवि पुरस्कार-2000 प्रदान किया गया।
रचनात्मकता एवं नवीन क्रियाओं (1999-2000) में उत्कृष्टता पर राष्ट्रीय पेट्रोलियम मैनेजमेंट प्रोग्राम (एनपीएमपी) में भारत पेट्रोलियम के कर्मचारियों को व्यक्तिगत श्रेणी के सभी तीन पुरस्कार प्राप्त हुए। साथ ही टीम श्रेणी में मान्यता स्वरूप चार प्रमाण-पत्र मिले।
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